April 18, 2026

बजट सत्र समाप्त: संसद के दोनों सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

नई दिल्ली, 18 अप्रैल । संसद का बजट सत्र शनिवार को दोनों सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगन के साथ समाप्त हो गया। यह सत्र राजनीतिक रूप से काफी उथल-पुथल भरा रहा और इसे विशेष बैठकों के लिए निर्धारित समय से आगे बढ़ाया गया था, जिसमें चुनावी सुधारों पर चर्चा की गई।

सत्र के दौरान सरकार द्वारा प्रस्तुत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, जो महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और परिसीमन प्रक्रिया लागू करने से संबंधित था, लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि पारित होने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने समापन संबोधन में बताया कि सदन की कार्य-उत्पादकता लगभग 93 प्रतिशत रही। उन्होंने जानकारी दी कि 28 जनवरी से शुरू हुए इस सत्र में कुल 31 बैठकें हुईं, जो 151 घंटे 42 मिनट तक चलीं। सत्र के दौरान केंद्रीय बजट 2026-27 पर करीब 13 घंटे चर्चा हुई, जिसमें 63 सदस्यों ने भाग लिया। अध्यक्ष ने बताया कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक, 2026 पर 21 घंटे 27 मिनट तक चर्चा हुई, जिसमें 131 सदस्यों ने हिस्सा लिया, हालांकि संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका।

सत्र के दौरान 12 सरकारी विधेयक पेश किए गए, जिनमें से 9 विधेयक पारित हुए। इसके अलावा सदन में लोक महत्व के 326 मुद्दे उठाए गए और नियम 377 के तहत 650 मामले प्रस्तुत किए गए। ओम बिरला ने बताया कि सत्र में 126 तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिए गए। साथ ही, संसदीय समितियों द्वारा 73 प्रतिवेदन प्रस्तुत किए गए और कुल 2089 दस्तावेज सदन पटल पर रखे गए।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 18 भारतीय भाषाओं में 181 वक्तव्य दिए गए, जिनका सफलतापूर्वक अनुवाद किया गया। सत्र के दौरान वामपंथी उग्रवाद पर अल्पकालिक चर्चा, पश्चिम एशिया की स्थिति पर प्रधानमंत्री का वक्तव्य और देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों से जुड़े महत्वपूर्ण विषय भी सदन में उठाए गए।

वहीं राज्य सभा का 270वां सत्र भी शनिवार को संपन्न हो गया। समापन अवसर पर सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही को सफल बताते हुए सदस्यों के योगदान की सराहना की। सभापति ने कहा कि बजट सत्र संसद के तीनों सत्रों में सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसमें लिए गए निर्णय देश की विकास दिशा तय करते हैं। उन्होंने बताया कि इस सत्र के दौरान सदन की कुल उत्पादकता 109.87 प्रतिशत रही और सदन ने 157 घंटे 40 मिनट तक कार्य किया।

सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा से हुई, जो चार दिनों तक चली और इसमें 79 सदस्यों ने भाग लिया। इस चर्चा का उत्तर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया। केंद्रीय बजट 2026-27 पर भी चार दिनों तक व्यापक चर्चा हुई, जिसमें 97 सदस्यों ने भाग लिया। इसके अलावा, दो प्रमुख मंत्रालयों के कामकाज पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

सदन ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते और पश्चिम एशिया की स्थिति पर मंत्रियों के स्वतः बयान भी सुने। वहीं, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर प्रधानमंत्री का वक्तव्य भी महत्वपूर्ण रहा। सभापति ने बताया कि सत्र के दौरान 50 निजी सदस्य विधेयक पेश किए गए। साथ ही, 12 क्षेत्रीय भाषाओं में 94 अवसरों पर सदस्यों ने अपने विचार रखे।

सत्र के दौरान राज्यसभा में 117 प्रश्न उठाए गए, 446 शून्यकाल उल्लेख हुए और 207 विशेष उल्लेख किए गए। इस सत्र में हरिवंश को तीसरी बार राज्य सभा के उपसभापति के रूप में पुनः निर्वाचित किया गया, जिस पर सदन के सभी दलों ने उन्हें बधाई दी। सभापति ने सदन के सुचारु संचालन में सहयोग के लिए सभी नेताओं, सदस्यों और सचिवालय के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। इसके बाद “वंदे मातरम्” की धुन के साथ सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

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